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Delhi दिल्ली। ये कहानी है लंदन के एक घर और उसमें रहने वाले 250 पूडल डॉग्स की। छोटे-छोटे कमरे और कैमरे की ओर हसरत भरी निगाहों से देखते इंसान के सबसे प्यारे दोस्त। ब्रिटेन की पशु कल्याण संस्था, 'रॉयल सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू एनिमल्स' (आरएसपीसीए) ने 2 अप्रैल को इन कुत्तों की एक तस्वीर सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की लंबे चौड़े नोट के साथ! मकसद इनको बचाना और उन हालात के बारे में बताना था जिसमें ये रहने को मजबूर थे। कुछ की हालत गंभीर थी तो कुछ कुपोषण से जूझ रहे थे। जिसने भी तस्वीरें देखी, उन्हें लगा ये तकनीक का खेल है! मान लिया ये किसी एआई टूल का कमाल है। लेकिन जब सच्चाई सामने आई, तो मामला कहीं ज्यादा गंभीर और परेशान करने वाला निकला।
आरएसपीसीए के अनुसार कुछ अधिकारियों को एक मकान में अत्यधिक संख्या में कुत्तों के होने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि छोटे-छोटे कमरों में बड़ी संख्या में कुत्ते ठूंसे हुए थे। गंदगी, बदबू और अव्यवस्था के बीच रह रहे इन डॉग्स की हालत ऐसी थी कि तस्वीरें देखने वालों को यकीन ही नहीं हुआ कि यह असली हैं। सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होते ही कई लोगों ने इन्हें “एआई-जनरेटेड” ही माना। इसके बाद आरएसपीसीए को स्पष्ट करना पड़ा कि ये तस्वीरें वास्तविक हैं और किसी भी तरह की डिजिटल हेरफेर का हिस्सा नहीं हैं। संस्था ने इसे “ओवरक्राउडिंग और लापरवाही का चरम उदाहरण” बताया।
जांच में सामने आया कि इतने बड़े पैमाने पर कुत्तों की संख्या बढ़ने के पीछे अनियंत्रित प्रजनन और मालिक की क्षमता से अधिक जानवर पाल लेना मुख्य कारण हो सकता है। संस्था के अनुसार कई मामलों में आर्थिक दबाव और देखभाल की कमी भी ऐसी स्थितियों को जन्म देती है। राहत कार्य के दौरान दर्जनों कुत्तों को तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए ले जाया गया, जबकि बाकी को अलग-अलग पशु संगठनों की मदद से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। संस्था के मुताबिक ऐसे मामलों में जानवर लंबे समय तक तनाव, कुपोषण और संक्रमण जैसी समस्याओं से जूझते हैं, जिनसे उबरने में समय लगता है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ब्रिटेन में “मल्टी-एनिमल” मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। पशु कल्याण संगठनों का मानना है कि पालतू जानवर रखना केवल भावनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे नजरअंदाज करने के परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। आरएसपीसीए के अनुसार पिछले एक साल ही में उनके सामने करीब 75 मामले सामने आए, जिनमें से हर एक में करीब 100 कुत्तों को रेस्क्यू किया गया।
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